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शनिवार, 31 अक्तूबर 2020

भगवान गणपति के 12 नाम


1- सुमुख-अर्थात सुन्दर मुख वाले।

2- एकदन्त-अर्थात एक दांत वाले।

3- कपिल-अर्थात कपिल वर्ण के।

4- गजकर्ण-अर्थात हाथी के कान वाले।

5- लम्बोदर-अर्थात लम्बे पेट वाले।

6- विकट-अर्थात विपत्ति का नाश करने वाले।

7- विनायक-अर्थात न्याय करने वाले।

8- धूम्रकेतु-अर्थात धुये के रंग वाली पताका वाले।

9- गणाध्यक्ष-अर्थात गुणों के अध्यक्ष।

10- भालचन्द्र-अर्थात मस्तक में चन्द्रमा धारण करने वाले।

11- गजानन-अर्थात हाथी के समान मुख वाले।

12- विघ्ननाशन-अर्थात विघ्नों को हरने वाले।

सोमवार, 26 अक्तूबर 2020

हनुमान मंत्र

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ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमित विक्रमाय

प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।


मंत्र करने की  विधि : 

  1. स्नान के बाद श्री हनुमान की पंचोपचार पूजा यानी सिन्दूर, गंध, अक्षत, फूल, नैवेद्य चढ़ाकर गुग्गल धूप व दीप जलाकर लाल आसन पर बैठ कर जीवन को सफल व पीड़ामुक्त बनाने की इच्‍छा से  हनुमान मंत्र का जप करें व श्री हनुमानजी की आरती करें।
  2. किसी भी संकट से बचने और सुरक्षित रहने के लिए हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड, रामायण, रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
  3. हनुमान जन्मोत्सव पर और बाद में साल में एक बार किसी भी मंगलवार को रक्तदान करने से आप हमेशा दुर्घटनाओं से बचें रहेंगे।
  4. 'ॐ क्रां क्रीं क्रों स: भौमाय नम:' मंत्र की 1 माला जाप हनुमान जयंती व मंगलवार को करना शुभ होता है। इसी तरह हनुमान जन्मोत्सव पर या मंगलवार को हनुमानजी को देसी घी से बने 5 रोट का भोग पर लगाने से दुश्मनों से मुक्ति मिलती है।
  5. यदि व्यापार में वृद्धि प्राप्त करना चाहते हैं तो हनुमान जन्मोत्सव पर सिन्दूरी रंग का लंगोट हनुमानजी को पहनाइए। हनुमान जन्मोत्सव पर मंदिर की छत पर लाल झंडा लगाने से आकस्मिक संकटों से मुक्ति मिलती है। जातक अपना तेज और शक्ति बढ़ाने के लिए हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड, रामायण, रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
  6. मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की सेवा हनुमान जयंती के दिन और बाद में महीने में किसी भी एक मंगलवार को करने से आपका मानसिक तनाव हमेशा के लिए दूर हो जाएगा। 
किस कामना के लिए हनुमान जी को क्या चढ़ाएं...

* दरिद्रता दूर करने के लिए प्रति मंगलवार चना-चिरौंजी चढ़ाएं।

* सौभाग्य, पुत्र कामना के लिए सिंदूर एवं चमेली का तेल चढ़ाएं।

* कष्ट दूर करने गुड़ और मूंग चढ़ाएं।

* सुखों की वृद्धि के लिए हनुमानजी को ॐ हनुमते नमः की माला जपें।
* पराक्रम वृद्धि के लिए हनुमानजी की गदा में सिंदूर व गाय का घी लगाकर लगाएं।

* अपने परिवार की उन्नति के लिए चमेली के पुष्प चढ़ाएं।

* संपत्ति के लिए गुड़, चना चढ़ाएं और घी के दीपक जलाएं।

* कष्टों से निवारण हेतु हनुमानजी को सिंदूर, नारियल और लड्डू अर्पण करें।
* जमीन, जायदाद के कार्यों की सफलता के लिए हनुमान चालीसा के 11 पाठ प्रतिदिन करें। लड्डू, नारियल का भोग लगाएं।

* सुखों में वृद्धि व कोर्ट कचहरी के मामले से निपटने के लिए तेल का दान करें।

* रूके हुए कार्यों में सफलता के लिए घी और सिंदूर का चोला और पीपल के पत्तों की माला राम नाम लिखकर चढ़ाएं।
* समस्त कार्य, मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए हनुमानजी को केशर के जल से स्नान कराएं।


मयूरेश स्तोत्र

  • मयूरेश स्तोत्र: परिवार की सुख-शांति, मानसिक परेशानी, समृद्धि और चारों ओर प्रगति, चिंता, रोग निवारण, भोग एवं मोक्ष  के लिए
  • मयूरेश स्तोत्र का पाठ किसी भी चतुर्थी तिथि से कर सकते हैं। 
  • अंगारक चतुर्थी पर मयूरेश स्तोत्र पढ़ने से इसका फल सहस्त्र गुना बढ़ जाता है।  


ब्रह्मा उवाच

पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा । मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ १ ॥

परात्परं चिदानन्दं निर्विकारं हृदि स्थितम् । गुणातीतं गुनमयं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ २ ॥

सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया । सर्वविघ्नहरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ ३ ॥

नानादैत्यनिहन्तारं नानारुपाणि बिभ्रतम् । नानायुधधरं भक्त्या मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ ४ ॥

इन्द्रादिदेवतावृन्दैरभिष्टुतमहर्निशम् । सदसद्व्यक्तमव्यक्तं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ ५ ॥

सर्वशक्तिमयं देवं सर्वरुपधरं विभुम् । सर्वविद्याप्रवक्तारं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ ६ ॥

पार्वतीनन्दनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम् । भक्तानन्दकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ ७ ॥

मुनिध्येयं मुनिनुतं मुनिकामप्रपुरकम् । समष्टिव्यष्टिरुपं त्वां मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ ८ ॥

सर्वाज्ञाननिहन्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम् । सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ ९ ॥

अनेककोटिब्रह्माण्डनायकं जगदीश्र्वरम् । अनन्तविभवं विष्णुं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ १० ॥


मयूरेश उवाच

इदं ब्रह्मकरं स्तोत्रं सर्वपापप्रनाशनम् । सर्वकामप्रदं नृणां सर्वोपद्रवनाशनम् ॥ ११ ।

कारागृहगतानां च मोचनं दिनसप्तकात् । आधिव्याधिहरं चैव भुक्तिमुक्तिप्रदं शुभम् ॥ १२॥


॥ इति श्रीमयूरेशस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

भगवान गणपति के 12 नाम

1- सुमुख-अर्थात सुन्दर मुख वाले। 2- एकदन्त-अर्थात एक दांत वाले। 3- कपिल-अर्थात कपिल वर्ण के। 4- गजकर्ण-अर्थात हाथी के कान वाले। 5- लम्बोदर-अ...

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