यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 12 जुलाई 2018

कनकधारा स्तोत्र

अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।।

मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।।

विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।।

आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।
आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।।

बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरि‍नीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु मे कमलालयाया:।।5।।

कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेर्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव्।
मातु: समस्त जगतां महनीय मूर्तिभद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।।6।।

प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्य भाजि: मधुमायनि मन्मथेन।
मध्यापतेत दिह मन्थर मीक्षणार्द्ध मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया:।।7।।

दद्याद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम स्मिभकिंचन विहंग शिशौ विषण्ण।
दुष्कर्मधर्ममपनीय चिराय दूरं नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाह:।।8।।

इष्टा विशिष्टमतयो पि यथा ययार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभंते।
दृष्टि: प्रहूष्टकमलोदर दीप्ति रिष्टां पुष्टि कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टराया:।।9।।

गीर्देवतैति गरुड़ध्वज भामिनीति शाकम्भरीति शशिशेखर वल्लभेति।
सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै तस्यै ‍नमस्त्रि भुवनैक गुरोस्तरूण्यै ।।10।।

श्रुत्यै नमोस्तु शुभकर्मफल प्रसूत्यै रत्यै नमोस्तु रमणीय गुणार्णवायै।
शक्तयै नमोस्तु शतपात्र निकेतानायै पुष्टयै नमोस्तु पुरूषोत्तम वल्लभायै।।11।।

नमोस्तु नालीक निभाननायै नमोस्तु दुग्धौदधि जन्म भूत्यै ।
नमोस्तु सोमामृत सोदरायै नमोस्तु नारायण वल्लभायै।।12।।

सम्पतकराणि सकलेन्द्रिय नन्दानि साम्राज्यदान विभवानि सरोरूहाक्षि।
त्व द्वंदनानि दुरिता हरणाद्यतानि मामेव मातर निशं कलयन्तु नान्यम्।।13।।

यत्कटाक्षसमुपासना विधि: सेवकस्य कलार्थ सम्पद:।
संतनोति वचनांगमानसंसत्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे।।14।।

सरसिजनिलये सरोज हस्ते धवलमांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्।।15।।

दग्धिस्तिमि: कनकुंभमुखा व सृष्टिस्वर्वाहिनी विमलचारू जल प्लुतांगीम।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथ गृहिणी ममृताब्धिपुत्रीम्।।16।।

कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरां गतैरपाड़ंगै:।
अवलोकय माम किंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया : ।।17।।

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिर भूमिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते बुधभाविताया:।।18।।

।। इति श्री कनकधारा स्तोत्रं सम्पूर्णम् ।। 

कोई टिप्पणी नहीं:

पूजन एवं देव स्थापना विधान

 पूजन एवं देव स्थापना विधान http://www.uou.ac.in/sites/default/files/slm/BAKK-202.pdf

लेबल

नवरात्र दुर्गा पूजा नवदुर्गा नवरात्रि महा नवरात्रि राम नवरात्रि महाशिवरात्रि सरस्वती सरस्वती वंदना मंत्र गणेश वंदना Shri Hanuman गणपति स्रोत शिवरात्रि श्री सरस्वती आरती बाल कृष्ण सुभाषितानि अच्युतं केशवं रामनारायणम् अच्युतस्याष्टकम् कनकधारा स्तोत्र कृष्ण गजमुख चालीसा बजरंग बाण विघ्नहर्ता शिव का चमत्कारी स्त्रोत श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक श्रीगणपति Chalisa Mangal Stotra Religious books Shri Hanuman Chalisa shiv अथर्वशीर्ष अहोई माता ऋण मोचक मंगल स्तोत्र कनकधारा स्तोत्रम् (हिन्दी पाठ) करवा चौथ कष्ट विमोचन मंगल स्तोत्र कामदा एकादशी कौण्डिन्य ऋषि गणेश स्तोत्रं गीत गोपालं चैत्र नवरात्रि णमोकार मंत्र दशरथकृत शनि स्तोत्र दुर्गाष्टमी निर्वाण षटकम् नील सरस्वती स्तोत्र पुरुषोत्तम मास पूजन प्रार्थना बधाई भजन भज गोविन्दम् भजन भागवत भोग आरती मंगल स्तोत्र मङ्गलम् भगवान विष्णुः मनसा सततम् स्मरणीयम् महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् रामत्व रामदूत रामायणं रुद्राष्टकम् वसंत नवरात्रि विद्वान् सर्वत्र पूज्यते विष्णुपञ्जरस्तोत्रम् शांति मंत्र शिवताण्डवस्तोत्रम् श्री गजानन प्रसन्न श्री गणेश श्री दत्तात्रेयवज्रकवचम्‌ श्री शिव श्री शिव चालीसा श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् श्री शिवमङ्गलाष्टकम् श्री स्कन्द पुराण श्रीमद् हनुमन्त बीसा श्रीराम तांडव स्तोत्रम् षोडशोपचार पूजन सुखदाता स्तोत्र स्त्रोत हनुमान