श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्


 ॐ नमः शिवाय

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सु॒गन्धिं॑ पुष्टि॒वर्ध॑नम् ।
उ॒र्वा॒रु॒कमि॑व॒ बन्ध॑नान् मृ॒त्योर् मु॑क्षीय॒ माऽमृता॑त् । [3]
ऋगवेद (7. 59. 12 ) यजुर्वेद (3. 60 )

श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नम: शिवाय ॥1॥

मन्दाकिनी सलिल चन्दन चर्चिताय नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मै म काराय नम: शिवाय ॥2॥

शिवाय गौरी वदनाब्ज वृन्द सूर्याय दक्षाध्वर नाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय ॥3॥

वसिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमार्य मुनीन्द्रदे वार्चित शेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय तस्मै व काराय नम: शिवाय ॥4॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै य काराय नम: शिवाय ॥5॥

फल श्रुति

पंचाक्षरमिदं पुण्यं य: पठेत शिव सन्निधौ।
शिवलोकम अवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥6॥

इति शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रं सम्पूर्णम्

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