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मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

महादेव की पूजा कब श्रेष्ठ है।

महादेव श्रृष्टि का सृजन और प्रलय सायंकाल-प्रदोषबेला में ही करते हैं, इसलिए इनकी पूजा आराधना का फल प्रदोष काल में ही श्रेष्ठ माना गया है। त्रयोदशी तिथि का अंत और चतुर्दशी तिथि के आरंभ का संधिकाल ही इनकी परम अवधि है। किसी भी ग्रह, तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण आदि तथा सुबह-शाम के संधिकाल को प्रदोषकाल कहा जाता है। इसलिए चतुर्दशी तिथि के स्वामी स्वयं भगवान शिव ही है।वैसे तो शिवरात्रि हर माह के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, किन्तु फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। 

Maha Shivaratri 2019| महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि


Monday, 4 March 2019


Also called

ਮਹਾਂ ਸ਼ਿਵਰਾਤਰੀ (Punjabi), ମହା ଶିବରାତ୍ରି (Odia), মহা শিবরাত্রি (Bengali), महा शिवरात्रि (Nepali), महा शिवरात्रि (Sanskrit), महा शिवरात्रि (Marathi), மகா சிவராத்திரி (Tamil), മഹാ ശിവരാത്രി (Malayalam), ಮಹಾಶಿವರಾತ್ರಿ (Kannada), మహా శివరాత్రి (Telugu), મહા શિવરાત્રી (Gujarati)

महाशिवरात्रि (बोलचाल में शिवरात्रि) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है।फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग ( जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है ) के उदय से हुआ। अधिक तर लोग यह मान्यता रखते है कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवि पार्वति के साथ हुआ था। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।  कश्मीर शैव मत में इस त्यौहार को हर-रात्रि और बोलचाल में 'हेराथ' या 'हेरथ' भी जाता है। [ विकिपीडिया]


अनुष्ठान

गेंदे के फूलों की अनेक प्रकार की मालायें जो शिव को चढ़ाई जाती हैं। इस अवसर पर भगवान शिव का अभिषेक अनेकों प्रकार से किया जाता है। 
जलाभिषेक : जल से 
दुग्‍धाभिषेक : दूध से। 

बहुत जल्दी सुबह-सुबह भगवान शिव के मंदिरों पर भक्तों, जवान और बूढ़ों का ताँता लग जाता है वे सभी पारंपरिक शिवलिंग पूजा करने के लिए आते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं। भक्त सूर्योदय के समय पवित्र स्थानों पर स्नान करते हैं जैसे गंगा, या (खजुराहो के शिव सागर में) या किसी अन्य पवित्र जल स्रोत में। यह शुद्धि के अनुष्ठान हैं, जो सभी हिंदू त्योहारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पवित्र स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहने जाते हैं, भक्त शिवलिंग स्नान करने के लिए मंदिर में पानी का बर्तन ले जाते हैं महिलाओं और पुरुषों दोनों सूर्य, विष्णु और शिव की प्रार्थना करते हैं मंदिरों में घंटी और "शंकर जी की जय" ध्वनि गूंजती है। भक्त शिवलिंग की तीन या सात बार परिक्रमा करते हैं और फिर शिवलिंग पर पानी या दूध भी डालते हैं।

शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पूजा में छह वस्तुओं को अवश्य शामिल करना चाहिए:

शिव लिंग का पानी, दूध और शहद के साथ अभिषेक। बेर या बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं;
सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिव लिंग को लगाया जाता है। यह पुण्य का प्रतिनिधित्व करता है;
फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि को दर्शाते हैं;
जलती धूप, धन, उपज (अनाज);
दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है;
और पान के पत्ते जो सांसारिक सुखों के साथ संतोष अंकन करते हैं।



महाशिवरात्रि पर ''ॐ नमः शिवाय'' का जप करते हुए शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से सभी दुःख-दारिद्रय मिट जाते हैं और शिव कृपा प्राप्त होती है। भांग, धतूरा, बेलपत्र और गन्ने के रस, शहद, दूध, दही, घी, पंचामृत, गंगा जल, दूध मिश्रित शक्कर अथवा मिश्री से शिव आराधना करने अथवा चढ़ाने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। इसदिन रात्रि जागरण और रुद्राभिषेक करने से प्राणी जीवनमृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है।


महाशिवरात्रि के दिन शिव की पूजा  में  निषेध 

  1. फूल - केतकी का फूल न चढ़ाएंं क्योंकि महादेव ने इस फूल का अपनी पूजा से त्याग कर दिया है। 
  2. इस दिन पूजा करते समय काले रंग के कपड़े ना पहनें। मान्यता है कि भगवान शिव को काला रंग बिल्कुल भी पसन्द नहीं है। 
  3. शिव की पूजा में शंख से जल और तुलसी अर्पित करना भी निषेध है। 
  4. भगवान शिव का नारियल पानी से अभिषेक भी नहीं किया जाता है। 
  5. तुलसी को भगवान शिव पर चढ़ाना मना है।
  6. तिल को शिवलिंग में चढ़ाना वर्जित माना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित किया जाना चाहिए।
  7. भगवान शिव को अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नही चढ़ता।
  8. कुमकुम या सिंदूर है वर्जित - कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक होता है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ना चाहिए। साथ ही शिवलिंग पर हल्दी भी न चढ़ाएं।
महाशिवरात्रि कथा 
कथा - १  कथा - २ 


मनोकामना पूर्ण करने केलिए :
  1. शमी के फूल को शिवलिंग पर अर्पित करने से जहां घर में अपार धन-संपदा का आशीर्वाद मिलता है, वहीं शमी का वृक्ष लगाने से शनि से जुड़े सभी दोषों से मुक्ति मिल जाती है।
  2. भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय बेला के फूल अर्पणकरने से आपको जीवन में सुंदर व योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होगी। 
  3. लाल व सफेद आंकड़े के फूल (मदार  के पुष्प )को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव को इसे अर्पित करने से वह शीघ्र प्रसन्न होते हैं। शिव पूजा में इस पुष्प के प्रयोग करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
  4. महाशिवरात्रि पर यदि कोई व्यक्ति अगस्त्य (हथिया, मुनिवृक्ष, वंगसेन) फूल के साथ भगवान शिव की उपसना करता है तो समाज में उसके मान-सम्मान और यश में वृद्धि होती है। 
  5.  भगवान शिव की पूजा में कनेर का पुष्प  चढ़ाने पर मनुष्य को मनचाहा धन लाभ प्राप्त होता है। 
  6. अन्न की कमी, दु:ख-दारिद्रय को दूर करने के लिए  महाशिवरात्रि पर जूही के फूल से भगवान शिव की पूजा  
  7. बेल के पत्ते और बेल फल भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है। 
  8. चमेली के फूल से शिवलिंग की पूजा करने पर मनुष्य के जीवन में सकारात्मकता ऊर्जा और वाहन सुख की प्राप्ति होती है। 
  9. धतूरा भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है। शिव की पूजा में इसके फल और फूल को विशेष रूप से चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि जो दंपत्ति पावन शिवरात्रि पर इस धतूरे के फूल के साथ भगवान शिव की पूजा करते है, उन्हें शिव कृपा से जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  10. रात में खिलने वाले हरसिंगार के फूल (पारिजात या शिउली का फूल ) को महादेव पर अर्पित करने से साधक के सुख एवं वैभव में वृद्धि होती है।
  11. भगवान शिव को चमेली का फूल बहुत प्रिय है।  चमेली के फूल से शिवलिंग की पूजा करने पर मनुष्य के जीवन में सकारात्मकता ऊर्जा और वाहन सुख की प्राप्ति होती है।

मनोकामना के अनुसार शिव पूजन

औढर दानी, सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता भगवान शिव


  1. विवाह में समस्या आ रही हैं तो आप महाशिवरात्रि पर गन्ने के रस से शिव का अभिषेक करने  से शीघ्र विवाह का संयोग बनता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  2. कर्ज  से मुक्ति व  पारवारिक सौहार्द में वृद्धि : शहद से अभिषेक से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन से कर्ज का मर्ज भी दूर हो जाता है और परिजनों के बीच सामंजस्य बना रहता है।
  3. वाहन सुख: दही से अभिषेक करने पर जीवन से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। साथ ही साधक को वाहन सुख की प्राप्ति होती है। 
  4. आरोग्य  और संतान :कच्चे दूध से शिव का अभिषेक करने से आरोग्य की प्राप्ति होती हैं और संतान का सुख मिलता है। 
  5. दु:खों से मुक्ति: जीवन से जुड़े तमाम तरह के दु:खों को दूर करने के लिए महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का किसी पवित्र नदी के जल से "ॐ नम: शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।
  6. धन और लंबी आयु: धन में वृद्धि और लंबी आयु पाने के महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का गाय के घी से अभिषेक करें। इस पूजन से भगवान शिव प्रसन्न होंगे और सभी मनोकामनाओं को शीघ्र पूर्ण करेंगे। 
  7. शत्रु से मुक्ति: यदि आपको ग्रह विशेष से कोई बाधा आ रही है या फिर शत्रु परेशान कर रहे हैं या फिर हर समय उनका भय बना रहता है तो महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का सरसों के तेल से अभिषेक करें। इस पूजा से शत्रुओं का नाश होता है। 
  8.  सौभाग्य प्राप्ति के लिये : शिवलिंग पर चंदन चढ़ाने से साधक का सौभाग्य जगता है। उसमे समाज में मान—सम्मान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 

शिवरात्रि

प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि कहलाती है, लेकिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी महाशिवरात्रि कही गई है। इस दिन शिवोपासना भुक्ति एवं मुक्ति दोनों देने वाली मानी गई है, क्योंकि इसी दिन अर्धरात्रि के समय भगवान शिव लिंगरूप में प्रकट हुए थे।

माघकृष्ण चतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि। 
शिवलिंगतयोद्रूत: कोटिसूर्यसमप्रभ॥

भगवान शिव अर्धरात्रि में शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए शिवरात्रि व्रत में अर्धरात्रि में रहने वाली चतुर्दशी ग्रहण करनी चाहिए। कुछ विद्वान प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी विद्धा चतुर्दशी शिवरात्रि व्रत में ग्रहण करते हैं। नारद संहिता में आया है कि जिस तिथि को अर्धरात्रि में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी हो, उस दिन शिवरात्रि करने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। जिस दिन प्रदोष व अर्धरात्रि में चतुर्दशी हो, वह अति पुण्यदायिनी कही गई है। इस बार 6 मार्च को शिवरात्रि प्रदोष व अर्धरात्रि दोनों में विद्यमान रहेगी।

ईशान संहिता के अनुसार इस दिन ज्योतिर्लिग का प्रादुर्भाव हुआ, जिससे शक्तिस्वरूपा पार्वती ने मानवी सृष्टि का मार्ग प्रशस्त किया। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि मनाने के पीछे कारण है कि इस दिन क्षीण चंद्रमा के माध्यम से पृथ्वी पर अलौकिक लयात्मक शक्तियां आती हैं, जो जीवनीशक्ति में वृद्धि करती हैं। यद्यपि चतुर्दशी का चंद्रमा क्षीण रहता है, लेकिन शिवस्वरूप महामृत्युंजय दिव्यपुंज महाकाल आसुरी शक्तियों का नाश कर देते हैं। मारक या अनिष्ट की आशंका में महामृत्युंजय शिव की आराधना ग्रहयोगों के आधार पर बताई जाती है। बारह राशियां, बारह ज्योतिर्लिगों की आराधना या दर्शन मात्र से सकारात्मक फलदायिनी हो जाती है।

यह काल वसंत ऋतु के वैभव के प्रकाशन का काल है। ऋतु परिवर्तन के साथ मन भी उल्लास व उमंगों से भरा होता है। यही काल कामदेव के विकास का है और कामजनित भावनाओं पर अंकुश भगवद् आराधना से ही संभव हो सकता है। भगवान शिव तो स्वयं काम निहंता हैं, अत: इस समय उनकी आराधना ही सर्वश्रेष्ठ है।

रविवार, 10 फ़रवरी 2019

Sarswati Pooja

माता सरस्वती का मंत्र
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥

माता सरस्वती का बीज मंत्र
ॐ ऐं ऐं ऐं महासरस्वत्यै नम: का जाप करें।

सूर्य देवता का मंत्र
ॐ घृणि सूर्याय नम:

भगवान विष्णु का मंत्र
ॐ पालनहाराय विष्णुवे विद्यारूपाय नम:। 

Mahashivratri Katha - 5 | शंखचूड़ का वध

शिव उपासना में शंख का इस्तेमाल वर्जित माना जाता है। दरअसल भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का भक्त था। शंख क...

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